बाड़मेर-जैसलमेर की राजनीति के दिग्गज चेहरे कर्नल सोनाराम चौधरी अब हमारे बीच नहीं रहे।
पूर्व सांसद और पूर्व विधायक कर्नल सोनाराम चौधरी का निधन बीती रात हृदय गति रुकने (Cardiac Arrest) के कारण हो गया। वह 4 बार बाड़मेर-जैसलमेर से सांसद और 1 बार बायतु से विधायक रह चुके थे।

कैसे बिगड़ी तबीयत?
सूत्रों के अनुसार, बीती रात अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। परिजनों ने उन्हें तुरंत दिल्ली के अपोलो अस्पताल में भर्ती करवाया, लेकिन इलाज के दौरान ही उन्होंने अंतिम सांस ली।
कर्नल सोनाराम का राजनीतिक सफर
- भारतीय सेना में सेवाएं देने के बाद राजनीति में कदम रखा।
- 1989 से लेकर कई बार सांसद बने।
- बायतु से विधानसभा चुनाव भी जीता।
- राजस्थान की राजनीति में एक सशक्त एवं ईमानदार नेता के रूप में पहचान बनाई।
जनता के नेता
प्रारंभ / उद्घाटन
संज्ञात्मक वाक्यांश जैसे:
“बाड़मेर–जैसलमेर के प्रखर नेता कर्नल सोनाराम चौधरी (पूर्व सांसद एवं विधायक) का हृदय गति रुकने से निधन हो गया। वह दिल्ली के अपोलो अस्पताल में इलाज के दौरान अंतिम सांसें छोड़ गए।”
उनका जीवन और राजनीति
- सेना सेवा (1971 युद्ध में हिस्सा, इन्जीनियर्स कोर में रैंक)
- कांग्रेस से सांसद (1996, 1998, 1999 – बाड़मेर–जैसलमेर)
- 2008 में विधायक (बायतु)
- 2013 में बीजेपी में शामिल, 2014 में सांसद (बाड़मेर–जैसलमेर)
मूल्यांकन और योगदान
- किसानों, ग्रामीण विकास और आधारभूत संरचना परियोजनाओं (जैसे सुखा बंदरगाह, भाभर रेल लाइन, बिजली योजनाओं) में योगदान
- राजनीतिक दृढ़ता, बेबाक शैली और जनसेवा के प्रति समर्पण।
निधन विवरण व भावनात्मक अंत
- कार्डिएक अटैक से अचानक अस्वस्थता, दिल्ली के अपोलो में भर्ती, निधन
- बाड़मेर–जैसलमेर क्षेत्र में शोक, जनसमर्थन, भावपूर्ण श्रद्धांजलि
ध्यान केंद्रित कीवर्ड्स
- “कर्नल सोनाराम चौधरी निधन”, “पूर्व सांसद बाड़मेर जैसलमेर”, “पूर्व MLA बायतु”, “Cardiac Arrest से निधन”, “दिल्ली अपोलो अस्पताल में निधन”
कॉल टू एक्शन
- “अपने राष्ट्रीय और क्षेत्रीय नेताओं के योगदान को याद करते रहें”
- “अगर आप उनसे जुड़ी कोई याद, संदेश या अनुभव साझा करना चाहें, तो कमेंट करें या शेयर करें”
कर्नल सोनाराम चौधरी हमेशा ग्रामीण विकास, शिक्षा और किसानों के मुद्दों को लेकर सक्रिय रहे। उनके निधन से पूरे बाड़मेर-जैसलमेर क्षेत्र में शोक की लहर है।
अंतिम संस्कार
परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार, उनका अंतिम संस्कार राजस्थान में ही किया जाएगा। हजारों लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचेंगे।
निष्कर्ष
कर्नल सोनाराम चौधरी का निधन राजस्थान ही नहीं बल्कि पूरे देश की राजनीति के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनका संघर्ष और सादगी आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगा।
